Posts

ताड़ के पेड़ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जरूर पढ़ें

Image
दोस्तों ताड़ का पेड़  बचपन से ही मेरे लिये एक सोचने वाला विषय होता था क्योंकि मैं लोगों को जब ताड़ के पेड़ पर ताड़ के रस को उतारते देखता था तो यही सोचता था यह लोग इतने ऊपर चढ कैसे जाते और इसके रस के लिये अपना जान जोख़िम में डालते इन ताड़ के पेड़ की लंबाई बहुत होती थी और ताड़ी उतारने वाले शरीर सुडौल होता था मैं इन्हें देख डर जाता की ऊपर से गिरे तो क्या होगा बसंत से इनमें फूल आता और यह लोग चढ कर उसमें से रस निकालना शुरू करते थे और यह रस पूरी रात टपकता मटका भर जाता  था कुदरत का खेल भी अजीब है इनके रस में मधुमक्खी नशा करके उसी में गिर जाती थी,सुबह की ताड़ी दवा का काम करता और शाम का जिसे धूप लगलजाता नशा का एक बार कोशिश की पीने की पर एक घूंट मे जैसे उल्टी सी आ जाये और माता जी की डांट की नशा होता फिर पीने की हिम्मत नही हुई,सोचा आपको भी बताऊँ तो जानिये इस अद्भुत पेड़ के बारे में ताड़ का परिचय (ताड़ नारियल की तरह लंबा और सीधा पेड़ होता है लेकिन ताड़ के वृक्ष में डालियाँ नहीं होती है वरन् तने से ही पत्ते निकलते हैं। आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि ताड़ का वृक्ष नर और नारी दो ...

खुशी बांटना चाहो तो ऊपर वाला भी दिल से साथ देगा जरूर पढ़ें

Image
गांव में कई ऐसे लोग होते हैं जो आज भी अपने स्वाभिमान को बरकरार रखते है और अपने मेहनत के पैसे से सामान खरीद कर प्रयोग करते है ऐसा ही कुछ एक गाँव में हुआ कि एक आदमी ने दुकानदार से पूछा - केले और सेब क्या भाव लगाऐ हैं ? केले 20 रु.दर्जन और सेब 100 रु. किलो । उसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेब और एक दर्जन केले चाहिये - क्या भाव है भैया ? दुकानदार: केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो। औरत ने कहा जल्दी से दे दीजिये  और ऐसा सुनते ही वहां दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने फल बेचने वाले दुकानदार को खा जाने वाली निगाहों से घूरकर  देखा । पर इससे पहले कि वो कुछ कहता - दुकानदार ने सभी  ग्राहक को इशारा करते हुये थोड़ा सा इंतजार करने को कहा। औरत खुशी खुशी खरीदारी करके दुकान से निकलते हुये बड़बड़ाई - हे भगवान  तेरा लाख- लाख शुक्र है , मेरे बच्चे फलों को खाकर बहुत खुश होंगे ।पर वहां खड़े  औरत के जाने के बाद दुकानदार ने पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ देखते हुये कहा : ईश्वर गवाह है भाई साहब ! मैंने आपको कोई धोखा देने की कोशिश नहीं की यह...

चांगेरी के पत्तो के सेवन से कई बीमारियों का सफाया

Image
चांगेरी एक घास नही बहुत ही फायदे की चीज है जो बसंत से अपने आप निकल आती है बचपन में खेल खेल में खूब खाते थे पर इसके फायदे बहुत हैं में पाये जाने वाले पोषक तत्व चांगेरी में पोटेशियम और आक्जेलिक अम्ल, विटामिन सी का अच्छा स्रोत पाये जाते  चांगेरी (तिनपतिया) के फायदे, गुण, नुकसान और औषधीय प्रयोग चांगेरी अनेक रोगों की दवा जैसे:- बुखार, बवासीर, मासिक धर्म, पेट दर्द, दस्त, सिरदर्द, दंतमंजन, पेचिस, मुख की दुर्गंध, मसूड़ों के रोग, पाचन शक्ति, दाह, धतूरे का विष आदि बिमारियों के इलाज में चांगेरी के औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है:- बुखार में चांगेरी के फायदे एवं सेवन विधि: चौथिया ज्वर में चांगेरी के लगभग आठ हजार पत्तों को अच्छी तरह पीसकर, 16 गुने जल में उबालने पर जब यह गाढ़ा हो जाये तो इसमें इतना घी डाले कि रबड़ी जैसा हो जाये, इसका 5-10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से बुखार तीन चार दिन में उत्तर जाता हैं। बवासीर में चांगेरी के फायदे एवं सेवन विधि: बवासीर-अर्श में चांगेरी के पंचाग को घी में सेंक कर शाक बनाकर दही के साथ सेवन करने से लाभ होता हैं। मास...

कैसे करें वर्मिकम्पोस्ट का निर्माण और व्यवसाय जरूर पढ़े

Image
भारत के कई किसान भाई खेती में लागत कम और मुनाफा कमाने के लिए जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं ऐसे में सभी किसान भाइयों के लिए कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है पर हम गांव एक्सप्रेस आज आपको बताने जा रहे हैं कि  वर्मीकम्पोस्ट का निर्माण कैसे करें और वर्मीकम्पोस्ट का बिज़नेस कैसे करे ।जिस प्रकार से लगातार बढ़ती महंगाई के कारण रासायनिक उर्वरक भी महंगे होते जा रहे है।सीमित उत्पादन और अधिक खर्च के कारण किसान कर्ज के नीचे दबते जा रहे है। इसके लिए इसका इलाज हमें खुद करना पड़ेगा | खेतों को सुधारने के साथ साथ वर्मी कम्पोस्ट को एक शानदार साइड बिज़नेस के तौर पर किया जा सकता है | तो किसान भाइयों इसे विस्तार से समझते हैं | वर्मीकम्पोस्ट का बिज़नेस कैसे करे   कुछ प्रगतिशील किसान केंचुवा खाद (वर्मी कम्पोस्ट ) ओधोगिक स्तर पर बना कर लाखों रूपये कमा रहे हैं | केंचुआ को किसानो  का मित्र एवं भूमि की जान  कहा जाता है। यह agriculture waste जैसे सरसों , चने,गंवार धान की परली इत्यादि  व मिट्टी को एकसार करके जमीन के अंदर तक  फैलाता है, इससे जमीन नरम होती है...

किसानों और कृषि क्षेत्रों के लिए जरूरी दिशा निर्देश

Image
किसान भाइयों अभी कई कृषि कार्य जो मौसम के अनुसार कर रहे हैं वो तो सही है पर आप सभी किसान भाई इन बातों का भी ख़ास ध्यान रखना जरूरी है जो मौसंम का अभी हाल  है कहीं  बारिश और कहीं कड़ी धुप हो रखी है ऐसे किसान भाई जरूर ध्यान दें         अनाज/दलहन/तिलहन 1.कटी हुई फसल अच्छी तरह साफ और स्वच्छ होनी चाहिए एवं दानों में नमी की मात्रा 10 से 12% तक रहे 2.गेंहू फसल की कटाई कम्बईनेर हार्वेस्टर से करें और भूसा स्ट्रॉ रीपर द्वारा बनाना सुनिश्चित करें 3.चना फसल की कटाई मजदूरों द्वारा करें एवं कटाई के दौरान अलगाव दूरी बनाये रखें 4.वृहद समूह में कृषि कार्य करने से बचें 5.गेंहू फ़सल की कटाई पश्चात रोटावेटर से खेत की जुताई करें एवं खेतों में आग ना लगाएं 6.बीज उत्पादन के लिए फसल की कटाई अलग से करें एवं कटाई के पश्चात बीजों को सफाई ब सुखाकर भंडारित करे      सब्जी फसले 1.लहसुन फसल की कटाई का कार्य सुनिश्चित करें एवं सुचारू रूप से भंडारित करें 2.प्याज, बैगन, टमाटर, मिर्ची, कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में 10 से 12 दिन के अंत...

जरूर पढ़ें कोरोना को हारने में भारतीय रेलवे सबसे आगे हुआ

Image
भारत के सभी देशवासियों को कोरोना से सुरक्षित रखने में भारतीय रेलवे का सबसे अहम् योगदान है चाहे वह किसी भी दृष्टिकोण से क्यों न हो जी हाँ हम गांव एक्सप्रेस लगातार आपको कोरोना से जुडी खबर पहुंचा रहे हैं ऐसे में सभी का हौसला बढ़ाना हमारा काम है जिससे दुगने जोश से सभी इस संकट से लड़ने के लिए तैयार रहें ऐसे में भारतीय रेलवे का सबसे अहम् योगदान है जिससे आप तक हम पहुंचा रहे हैं इस महामारी को कम करने के लिए भारतीय रेल ने लगभग 6 लाख रियूजेबल फेसमास्क एवं 40000 लीटर से अधिक हैंड सैनिटाइजरों का उत्पादन किया है रेलवे के सभी जोन, उत्पादन इकाइयां और पीएसयू इसमें शामिल, डब्ल्यूआर, एनसीआर, एनडब्ल्यूआर, सीआर, ईसीआर और डब्ल्यूसीआर जैसे कुछ जोन इस संबंध में आगे रहे फेसमास्क और हैंड सैनिटाइजरों को ड्यूटी पर आने वाले सभी कर्मचारियों को उपलब्ध कराया जा रहा है, उन्हें संविदा श्रमिक भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए किये जा रहे उपायों की निरंतरता में, भारतीय रेल भारत सरकार की स्वास्थ्य पहलों को सहायता देने के सभी प्रयास कर रही है। इस दिशा में भारतीय रेल अपने सभी जोनल रेलवे, उत्...

जाने कोरोना संकट में किसान आदिवासियों के लिए सरकार का कदम

Image
कोरोना के इस संकट में आदिवासी किसानों को ध्यान में रखते हुए  केंद्रीय जनजातीय विभाग ने आदिवासी शाषित राज्यों के मंत्रियों को पत्र लिखा और कहा कि वे राज्य नोडल एजेंसियों को दृढ़ संकल्‍प के साथ न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में लघु वनोपज खरीदने की सलाह दें केन्‍द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने 15 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि वे राज्य नोडल एजेंसियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लघु वनोपज (एमएफपी) खरीदने की सलाह दें। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश; गुजरात; मध्य प्रदेश; कर्नाटक; महाराष्ट्र; असम; आंध्र प्रदेश; केरल; मणिपुर; नागालैंड; पश्चिम बंगाल; राजस्थान; ओडिशा; छत्तीसगढ़; और झारखंड शामिल हैं। पत्र में, उन्होंने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप के कारण उत्‍पन्‍न मौजूदा स्थिति ने देश में एक अभूतपूर्व चुनौती पेश कर दी है। भारत में लगभग सभी राज्य और संघ शासित प्रदेश अलग-अलग डिग्री के संक्रमण से प्रभावित हैं। ऐसी स्थिति में जनजातीय समुदायों सहित गरीब और उपेक्षित लोगों की स्थिति बेहद नाजुक है। लघु वनोपज (एमएफपी) / गैर टिम्बर वनोत्‍पाद (एनटीएफपी) के संग्रह और फ...